Monday, February 15, 2010

यथार्थ!!!

छीनता हो स्वत्व कोई, और तुम , त्याग तप से काम  लो यह पाप है ,
पुण्य है, विछिन्न कर देना उसे , बढ़ रहा तेरी तरफ जो हाथ है!!!!

          दिनकर की इन्ही पंक्तियों से सीख  लेने  की आवश्यकता है  हमारी सरकार को ! ऐसा कैसे हो सकता है कि हम ऐसे  देश  से हाथ मिलाना चाहे जिसके हाथ हमारे देशवासियों के खून से रंगे हुए हो ! आज समझना होगा कि आखिर क्या है हमारी प्राथमिकता ?  एक फिल्म , एक भाषा , एक अभिनेता ,एक नया राज्य ,एक और स्मारक और पार्क, या ये देश जो इन सबके वजूद का स्रोत है! निश्चय ही आज सभी की भूमिकाएं तय होनी चाहिए !

         किसी  फिल्म का  प्रस्तुतीकरण होना चाहिए, लेकिन क्या इसके लिए देश की सुरक्षा से समझौता ? बिलकुल नहीं ! गृह मंत्री का ये बयान कि खुफिया एजेंसियां फेल नहीं हुयी है, इसी बात की ओर इशारा करती है कि कमी राज्य सरकार के तंत्र में है!  कोई अभिनेता इतना महत्वपूर्ण कैसे हो सकता कि एक प्रमुख राजनितिक दल पूरे राज्य की ब्यवस्था तहस नहस करने को आतुर हो जाये ! भूमिका की जांच उनकी भी होनी चाहिए जो इस भयावह आतंकवाद और नक्सलवाद  को भुलाकर स्वयं की मूर्तियों की रखवाली के लिए विशेष टास्क फोर्स गठित करने में संलग्न  हैं !

        यहाँ बात उनकी भी होनी चाहिए जो एक भाषा और तथाकथित भूमिपुत्रों के नाम पर संविधान की धज्जियाँ उधेड़ने में ही अपनी सार्थकता की व्यर्थ तलाश कर रहे हैं ! आज इन सभी संकीर्ण हितों से बढ़कर देशहित को महत्व देना समीचीन है क्यूंकि हमें नहीं भूलना चाहिए की हमारी नागरिकता एक है और वो है भारतीय होना ! सभी को मिलकर राष्ट्र भावना से भरकर और अपने तुच्छ स्वार्थों को भुलाकर एक ही उद्देश्य के लिए काम करने की आवश्यकता है जो है भारत की रक्षा ! अन्य सारी बातें इसी से तय होती है !! 

8 comments:

Udan Tashtari said...

काश, सरकार कुछ सीख ले लेती.

संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI said...

bhai, aapki baat sahi hai,par sarkar yahi paiman lagoo kar de to desh ke bheetar hi jo deshvasiyon ke qaatil baithe hain ,unka kya hoga ....?

Shivam said...

संतोष जी आप की चिंता जायज है ! इसीलिए मैंने उन सभी तत्वों की भूमिका के मूल्याङ्कन के पक्ष में हूँ ! आखिर हमने ही तो अधिकार दिए हैं ऐसे लोगों को वरना आप तो जानते ही हैं कितनी हैशियत है इनकी ! धन्यवाद् !!!!!!

INDRADHANUSH said...

welcome!

shama said...

Behad sahi kaha...!

kshama said...

छीनता हो स्वत्व कोई, और तुम , त्याग तप से काम लो यह पाप है ,
पुण्य है, विछिन्न कर देना उसे , बढ़ रहा तेरी तरफ जो हाथ है!!!!
Kitna sach hai..

जयराम “विप्लव” { jayram"viplav" } said...

कली बेंच देगें चमन बेंच देगें,
धरा बेंच देगें गगन बेंच देगें,
कलम के पुजारी अगर सो गये तो
ये धन के पुजारी
वतन बेंच देगें।



हिंदी चिट्ठाकारी की सरस और रहस्यमई दुनिया में प्रोफेशन से मिशन की ओर बढ़ता "जनोक्ति परिवार "आपके इस सुन्दर चिट्ठे का स्वागत करता है . . चिट्ठे की सार्थकता को बनाये रखें . नीचे लिंक दिए गये हैं . http://www.janokti.com/ ,

योगेश स्वप्न said...

achcha hai, blog jagat men swagat hai.