Tuesday, December 20, 2011

हक़ीकत है नहीं, कुछ भी...

जीवित होना मात्र,

लक्ष्य नहीं मेरा...
कुछ भले जज़बात,
भी तो चाहिए...

हजारों बंदिशों में,
जी रहा हूँ मैं अभी...
मर जाने के हालात,
यूँ न लाईये...

ज़माना है,
मेरा दुश्मन...
कि दुश्मन मैं,
जमाने का...

कोई बतला दे,
मुझको अंत...
इस अनचाहे,
फ़साने का...

कोशिश है मेरी,
अपना लें...
मुझको सब,
मेरे अपने...

हक़ीकत है नहीं,
कुछ भी...
पराये हो गए,
.......सपने !!!

Tuesday, November 1, 2011

मन की कालिख.....


आज अकेले दिया जलाकर,
घर में उजाला कर बैठे !
मन की कालिख साफ़ नहीं की,
तन उजियारा कर बैठे !!


आज अकेले दिया जलाकर,
घर में उजाला कर बैठे !
मन की कालिख साफ़ नहीं की,
तन उजियारा कर बैठे !!


सुबह-शाम  प्रभु नाम की माला,
मस्तक तिलक लगाना यूँ....
मात-पिता की सुध बिसरा के,
उनको यूँ ठुकराना क्यूँ ??

खुद की खातिर खूब जतन की,
खरा खजाना भर बैठे !
मंदिर-मस्जिद प्रतिदिन पहुंचे,
क्यूँ ना अपने घर बैठे ??

आज अकेले दिया जलाकर,
घर में उजाला कर बैठे !
मन की कालिख साफ़ नहीं की,
तन उजियारा कर बैठे !!

जनम-मरण के जाल में फंसकर,
जब तू जग में आता है !
सच-सच बोल! अरे ये प्राणी,
क्या कुछ "कर" में लाता है ??

निडर हो कहते, निर्भय रहते,
मौत से फिर क्यूँ डर बैठे ?
स्नेह को भूले, दंभ में फूले,
जीते जी क्यूँ मर बैठे ??


आज अकेले दिया जलाकर,
घर में उजाला कर बैठे !
मन की कालिख साफ़ नहीं की,
तन उजियारा कर बैठे !!

आज अकेले दिया जलाकर,
घर में उजाला कर बैठे !
मन की कालिख साफ़ नहीं की,
तन उजियारा कर बैठे !!



Friday, August 12, 2011

काला धन काली सरकार , काली सब करतूत, न जाने कब क्या कर बैठे, कांग्रेस का भूत.....

आदरणीय मित्रों एवं स्नेहीजन .....
              
                    पिछले तीन महीनों से कुछ नहीं लिख पाया और न ही ज्यादा समय ब्लॉग पर दे पाया , इसके लिए करजोर क्षमा ! देश में उभरे हालात एवं स्थितियों को ब्यक्त करती एक कविता आप के समक्ष प्रस्तुत है ....राजनीतिक ब्यंग्यों पर लिखी मेरी मंचीय रचनाओं में से एक.............

देश का हुआ विकास नाश देशवासियों का,
काला धन कलमुयें नेता भरने लगे !
राडिया ने रतन को राजा से मिलाया देखो,
कलमाड़ी और भी कमाल करने लगे !

सेना के जवान देश के लिए हैं देते जान,
आदर्श घोटाला चाहवान करने लगे !
दिग्विजय सिंह हिन्दू आतंक के नाम पर,
लादेन "जी" के नाम की अब माला जपने लगे !

शीला का गुमान आसमान चढ़ बोल रहा, 
दिल्ली पर राज अब दलाल करने लगे !
राहुल का करिश्मा बिहार में नहीं चला,
हाय हाय लालू पासवान करने लगे !

मुख्यमंत्री बनने की चाह जगी ममता में,
ध्वस्त हुई  रेल ,रेल घाटे बढ़ने लगे !
मायावती मूर्तियों के मोह में मगन हुईं,
अमर "जया" प्रेम में अकेले पड़ने लगे !

कल्याण मुलायम की चाल के हुए शिकार,
"नेताजी" आज़म साथ साथ चलने लगे !
संदेह सोनिया मनमोहन की नियत पे होता जब, 
थामस जैसे दागी रखवाली करने लगें !

दैत्य रुपी भ्रष्टाचार से बचाने देश अब,
कैग- कोर्ट- अन्ना- रामदेव दिखने लगे !
मिस्र की मिशाल ले के देश को बचाने हेतु,
"मिश्रा" की मशाल रुपी कलम लिखने लगे !!

Monday, May 16, 2011

यकीं है ख़ुद को कि ...

बहुत सोचा , बहुत समझा ,
मैं लेकिन सह नहीं पाया !
बिना देखे उसे , इक दिन ,
मगर मैं रह नहीं पाया !!

दिखाए ख्वाब उसने ,
जश्ने - ज़न्नत के , मुझे लेकिन !
हक़ीकत मैं उन्हें फिर भी ,
 कभी भी कर नहीं पाया !!

पहेली बनके रह गयी है ,
 देखो... ज़िन्दगी मेरी !
कि क़िस्मत ने दगा इक बार ,
 फिर मुझसे है फरमाया !!

वे कहते हैं मुसीबत , यूँ ही ,
 टल जाएगी.. ऐ मेरे दोस्त !
मुझे भी है यकीं , क्यूंकि ,
साथ मेरे , मेरे अपनों का है साया !!

ज़माने से नहीं सिकवा ,
शिकायत है न गैरों से !
ख़ुद ही को कोसता हूँ ,
दिल की मैं अपने , सुन नहीं पाया !!

अभी भी इल्म है मुझको ,
 कि मंजिल है मेरी मुमकिन !
दुखों के बादलों संग मैं ,
 अभी भी बह नहीं पाया !!

यकीं है ख़ुद को कि ,
इकदिन सितारा मेरा चमकेगा !
शख्सियत की बुलंदी का ख़जाना ,
मेरे फिर , काम है आया !!

Tuesday, May 10, 2011

माँ बिन बालक ...

मात - स्नेह - वंचन से आहत ,
मात - स्नेह की अविरल चाहत ,
पाले.. मन में नन्हां बालक ,
तड़प रहा जीवन में नाहक !

बिन माँ , बालक की जो दशा है ,
आखेटक की जाल में जैसे फंसा है ,
दिन - दिन रोता याद न जाती ,
मात - मिलन का एक नशा है !

देख विधाता ! माँ की महिमा ,
तुझसे ऊपर माँ की गरिमा ,
स्नेहातुर बालक पर तू दया कर ,
पुनः न माँ बालक को जुदा कर !

माँ के दुःख भी आसीम निरंतर ,
माँ न करे संतानों में अंतर ,
पर्याय बन चुके जैसे माँ - दुःख ,
स्वप्न में भी ना मिलता है सुख !

आओ उस बालक से सीखें ,
बिन माँ हम सब उसी सरीखे ,
माँ का मान हो सबसे पहले ,
ईश्वर ! माँ के सब दुःख हर ले !

प्रेम से मीठी - मीठी बातें ,
बढ़ी उम्र की हैं सौगातें ,
इतना ही बस हमको करना ,
पड़े न माँ से हमें बिछड़ना !! 

Sunday, May 8, 2011

ज़ालिम ये जिंदगी ...

ज़ालिम ये जिंदगी , ग़मों का सैलाब लाती है !
ज़ालिम ये जिंदगी , ग़मों का सैलाब लाती है !
रुलाती है ज्यादा , और थोड़ा हंसाती है !
कहते हैं सभी , कि खुश रहो यारों ,
पर कौन बताये हमें , ये खुशी कहाँ से आती है ?

बड़ी उम्मीद से , कदम हम जहाँ में रखते हैं !
बड़ी उम्मीद से , कदम हम जहाँ में रखते हैं !
आखिर में, इन्हीं उम्मीदों के , बोझ तले दबते हैं !
कहते हैं , सपने बड़े देखा करो ,
कम्बख्त सपने , क्या पेट भरा करते हैं ?

ख़ुदा अपने बन्दों का इम्तिहान लेता है !
ख़ुदा अपने बन्दों का इम्तिहान लेता है ! 
छोटी सी जिंदगी भी , टुकड़ों में देता है !
कहते हैं , ख़ुदा का रहमों करम है सब ,
ग़मों से जूझने की ताकत भी , खुदा ही तो देता है !

हमारी ख्वाहिशें गर , खुद में सिमट जाएँ , तो क्या करें ?
हमारी ख्वाहिशें गर , खुद में सिमट जाएँ तो , क्या करें ?
सभी को भूल कर , सब खुद पे लुटाएं , तो क्या करें ?
बहुत कुछ रख के भी , ख़ाली ही जायेगा ,ऐ मेरे दोस्त !
जो इंसान से हैवान बनाये , ऐसी दौलत का क्या करें ?

Friday, May 6, 2011

आस लगी है...

आस लगी है दिल में मेरे , 
प्रिय तुम वापस आओगे !
प्रीत मेरे तुम , मीत तेरा मैं ,
मुझको गले लगाओगे !

जब से मुझ से दूर गए तुम ,
एक पल चैन नहीं पाया !
रोया हूँ , मैं तड़पा  हूँ मैं ,
विरह ने खूब है तरसाया ! 

छोड़ दिया जग सारा मैंने ,
प्रिय तुम तो अपनाओगे !
भूली बिसरी यादें सारी ,
ले तुम वापस आओगे !

आस लगी है दिल में मेरे ,
प्रिय तुम वापस आओगे !
प्रीत मेरे तुम , मीत तेरा मैं ,
मुझको गले लगाओगे !

प्यार भरे दिन याद करूँ जब ,
आँख मेरी भर आती है !
दिल में संजो के रखी मैंने ,
स्नेह की पहली पाती है !

पूंछूं रोज , हे ! विरह के बादल ,
कब तुम लौट के जाओगे ?
आयेंगे जब प्रियतम मेरे ,
प्रेम सुधा बरसाओगे ?

आस लगी है दिल में मेरे ,
प्रिय तुम वापस आओगे !
प्रीत मेरे तुम , मीत तेरा मैं ,
मुझको गले लगाओगे !

उनकी मींठी मींठी बातें ,
सुनकर मैं इठलाता था !
रूठ अगर वो मुझसे जातीं ,
ह्रदय से उन्हें मनाता था !

भाव भंवर में फसा हुआ हूँ ,
कब आ मुझे सम्हालोगे ?
देर न कर मर जाऊंगा मैं ,
फिर तुम भी पछताओगे ?
शिवम् सहज ही कहे ये तुमसे ,
ऐसा प्रेम न पाओगे !

आस लगी है दिल में मेरे ,
प्रिय तुम वापस आओगे !
प्रीत मेरे तुम  मीत तेरा मैं , 
मुझको गले लगाओगे !!

आस लगी है दिल में मेरे ....







Thursday, May 5, 2011

ओसामा की मौत का आकर्षण ...

                अब जब चारों ओर ओसामा और ओबामा के चर्चे चल ही रहे हैं तो आखिर मैं अपने आप को कब तक रोक पाता , अतः मैंने भी सोचा चलो कुछ तो लिख ही सकते हैं इन दो महानुभाओं के बारे में !

               दरअसल जब से ओसामा बिन लादेन की मौत की खबर आयी है तभी से अलग अलग वर्ग के लोग अलग अलग तरीके से इस खबर को प्रयोग करने में लगे हुए हैं ! कई लोगों के लिए तो ऐसी खबरें रोजगार के अछे खासे अवसर लेकर आती हैं ! प्रिंट मीडिया से लेकर इलेक्ट्रोनिक मीडिया, एवं इन्टरनेट सभी जगहों पर दिन भर सिर्फ एक ही खबर "ओबामा किल्ड ओसामा" ! हद तो तब हो गयी जब एक ऑनलाइन अखबार ने ओसामा की जगह ओबामा की मौत की खबर छाप दी ! हालाँकि ओसामा की मरने की खबर मुझे पहले ही मिल चुकी थी लेकिन जैसे ही मैंने ओबामा के मरने की गलत खबर पढ़ी , मैं तो दंग रह गया अल कायदा की तीव्र प्रतिक्रिया और प्रतिशोध के बारे में सोचकर ! राहत की बात यह थी की मुझे यह समझते देर नहीं लगी की यह सिर्फ होड़बाजी में गलत लिखे जाने का मामला है ! 

                हाँ तो माफ़ कीजिये मैं अपने विषय से थोडा भटक गया था ! मैं बात कर रहा था रोजगार की , सभी टी. वी. चैनलों पर कई सारे विशेषज्ञ एकाएक पधार बैठे और अमेरिका-भारत-पाकिस्तान जैसे देशों पर इस घटना से पड़ने वाले प्रभावों पर अपनी अपनी दलीलें देने लगे ! बात कभी पाकिस्तान के बेनकाब होने को लेकर होती तो कभी भारत के दावे के मजबूत होने की ! लेकिन असल बात तो इन सभी की जेबों में अच्छी खासी रकम भरने की थी जिस पर किसी ने भी चर्चा नहीं किया ! इस पूरे घटनाक्रम में हमारे एक महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील राज्य अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के गायब होने की खबर तो स्वयं ही गायब हो गयी ! 

               पहले तो यह संदेह भी किया गया की क्या ओसामा बिन लादेन वास्तव में मारा भी गया है  या नहीं ? फिर , की क्या सच में पाकिस्तान को इस ऑपरेशन में शामिल किया नहीं किया गया था ? क्या पाकिस्तान को सच में नहीं पता था की ओसामा बिन लादेन वहां पिछले लम्बे समय से रह रहा था ? आदि ! मैं भी इस प्रमुख समाचार को तभी से फ़ॉलो कर रहा  हूँ ! कुछ ऐसी बातें मेरे मन में आ रही थी जिनकी तलाश मैं किसी और के विचारों  में कर रहा था की कोई यदि उन मुद्दों पर बोल दे तो मेरे पेट की पीड़ा शांत हो जाये और मुझे इस खबर पर लिखने की हाड़तोड़ मेहनत न करनी पड़े ! लेकिन शायद विधाता को मेरा आराम रास नहीं आ रहा था अतः किसी ने भी इन मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया ! यहाँ मैं उन बातों को या सही अर्थों में कहें तो मेरे मन की शंकाओं को संक्षेप में बताना चाहूँगा !

                 जब ये सारी बातें हो रही थीं  कि , पाकिस्तान को इस ऑपरेशन के बारे में कोई जानकारी नहीं थी , और उधर अमेरिका ने सारा श्रेय अपने माथे  पर ले लिया तो अचानक मेरे मन में बात आयी की ऐसा भी हो सकता है की पाकिस्तान की भूमिका ओसामा को मारने में रही हो लेकिन पाकिस्तान को आतंकवादियों के हमले से बचाने के लिए रणनीतिक रूप से अमेरिका ने पाकिस्तान की भूमिका को नकारा और पाकिस्तान भी इस से पल्ला झाड़ते हुए दिखाई दिया ! हम सभी जानते हैं की लादेन की मौत का बदला आतंकवादी जरूर लेंगे लेकिन यह बदला अमेरिका की बजाय पाकिस्तान से लेना ज्यादा आसान है क्यूंकि पाकिस्तान में ऐसी घटनाएँ रोजमर्रा की बात हो गयी हैं ! ऐसे में यदि यह बात सामने आ जाती की पाकिस्तान ने लादेन के मारे जाने में अमेरिका का साथ दिया है तो पाकिस्तान पर ऐसे आतंकी हमलों की संभावनाएं ज्यादा बढ सकती हैं ! अंत में मेरा विश्लेषण यह है इन्ही कारणों से पाकिस्तान को इस ऑपरेशन से अलग बताया जा रहा है ! 

                  दूसरी ओर अब अमेरिका द्वारा ऑपरेशन और लादेन की तस्वीरें जारी न किये जाने की भी खबरें आ रही हैं , जिसके पीछे कारण यह बताया जा रहा है कि ऐसी तस्वीरों से प्रतिशोध की घटनाओं  को बल मिलेगा ! पुनः यह सारा प्रकरण इस पुरे ऑपरेशन पर ही संदेह का आवरण चढ़ा देता है क्यूंकि जो कारण दिया जा रहा है वह उतना तार्किक नहीं दिखता क्यूंकि बदला लेने की घटनाएँ तो वैसे भी संभावित हैं ही ! दूसरी ओर इतनी बड़ी सफलता के सबूतों  को अमेरिका बाहर आने से क्यों रोक रहा है जब की यही अमेरिका इराक के सद्दाम हुसैन की फाँसी का लाइव विडियो टेप भी जारी कर चुका है !

                 ऐसा लगता है मैं भी कुछ ज्यादा ही विश्लेषक बनने की जुगत में लग गया , शायद कोई टी.वी. वाला बुला ले , लेकिन भैया ! हमारी ऐसी हैशियत कहाँ है ! हम तो ब्लागर हैं जिसे अपने लेख पढ़े जाने की संभावनाओं पर भी कम ही भरोसा रहता है ! आप इसे पढ़ लें , हम तो इसी से धन्य हैं ! धन्यवाद् !!!

Wednesday, May 4, 2011

धोखा....

दीवानों की महफ़िल में ,
देखो हम भी आ ही गए !
 ग़म भी हुआ हम हंसना भूले ,
आखिर धोखा खा ही गए !!

प्रथम दिवस के प्रथम मिलन की ,
याद हमें जब आती है !
रोम रोम में लहर ख़ुशी की ,
 मस्ती मन में छाती है !!

साथ जियेंगे, साथ मरेंगे , 
जीते जी हम जुदा  न होंगे !
दुश्मन हो चाहे सारा ज़माना , 
शीश प्रेम का झुकने न देंगे !!

सारी कसमें हमने खायीं ,
पर वो सितम  तो ढा ही गए !
ग़म भी हुआ हम हंसना भूले ,
आखिर धोखा खा ही गए !!

मधुर मुलाकातों के मौके ,
माघ महीने में मिलते थे !
उनकी सहज सुहानी सूरत ,
 पर बरबस ही हम मरते थे !!

सारे समय साथ उनका था ,
दोस्त यार की याद किसे थी !
जेब, जवानी जान उसे दी ,
फिक्र हमारी नहीं जिसे थी !!

हमने ह्रदय से जिसको चाहा ,
वे तो हमें भरमा ही गए !
ग़म भी हुआ, हम हंसना  भूले ,
आखिर धोखा खा ही गए !!

वे जब थे तो गम ही क्या था ?
बिन बोले ही हाल बयां था !
दिल दरिया था, सांसे सरगम ,
उनका हर एहसास जवां था !!

(अब जब वे नहीं हैं तब का हाल देखिये...... )

ताप धूप की तपिश बढ़ाती , 
प्रेम पवन भी रास न आती !
मद्धम-मद्धम बारिश की बूंदे ,
मन को मेरे नहीं लुभाती !!

समय चक्र ने करवट बदली ,
उड़ने की सजा हम पा ही गए ! 
ग़म भी हुआ हम हंसना भूले ,
आखिर धोखा खा ही गए !!

दीवानों की महफिल में , 
देखो हम भी आ ही गए !
ग़म भी हुआ हम हंसना भूले ,
आखिर धोखा खा ही गए !!

Tuesday, May 3, 2011

इलेक्सन गाथा ...

ई बार इलेक्सन क प्रकोप ,
फैलल बा कोने कोने में !
उत्तर प्रदेश से दिल्ली तक ,
मिलि गयल सुहागा सोने में !

जे मरा रहेन पुरखा सर्गे से ,
मुहर लई के आइ गएँन !
कोउ दस नाएंन, कोउ बीस नाएंन , 
कोउ पूरा सतक लगाई गएँन !

कुछ काम धाम कइके घर क ,
हमहूँ सोचा असनान करी !
ई चुनाव पावन पर्व अहै ,
चली के आपन मतदान करी !

जब पहुचि गए पोलिंग पर हम ,
एक जने से पर्ची पाई गए !
मन में कुछु भाव रहा अइसन ,
धीरे से हम ओलिआयि गए !

एक लरिका कहेसि सुना चच्चा ,
नहकई तकलीफ उठाय तूं !
ई बूथ केसरिया भय बाटई ,
का करई बदे यहं आय तूं !

यहं त बा एकदम रामराज्य ,
हम आपन फ़र्ज चुकाई दिहा !
तोहरई भर नाहीं, घरे भरे क , 
वोट सबेरहीं डालि दिहा !! 

                     (फोटो : गूगल इमेज से साभार )



Saturday, April 30, 2011

हैं सभी अपने ...

सहनशील , सृजनशील...
..संघर्षशील नारी की ,
 दुःख भरी दास्ताँ !
हो कोई भी रूप ,
सिर्फ धूप ही धूप !
हैं सभी अपने ....
पर नहीं किसी को वास्ता !
नारी की दुःख भरी दास्ताँ !!

कभी परिवार के लिए, 
कभी समाज के लिए !
कभी कल के लिए... 
..तो कभी आज के लिए ! 
करती आयी है त्याग ,
सहती आयी है आग !
चलती है , रुकती है ,
बदल देती है रास्ता !
हैं सभी अपने .... 
पर नहीं किसी को वास्ता !
नारी की दुःख भरी दास्ताँ !!

कभी पिता की आन के लिए ,
कभी पति की शान के लिए !
कभी बेटे की जान के लिए ...
..तो कभी बेटी के मान के लिए !
देती आयी है बलिदान ,
सहती आयी है अपमान !
रोती है , घुटती है ,
समय भी, उसे है फांसता !
हैं सभी अपने ....
पर नहीं किसी को वास्ता !
नारी की दुःख भरी दास्ताँ !!

Friday, April 29, 2011

अब मैं बोलूँगा...

बस...बस !! अब मैं बोलूँगा  
नहीं रोकूंगा खुद को 
डरूँगा नहीं , लडूंगा !
अब अपनी बंद आँखें खोलूँगा ! 

हर्ज नहीं ग़र मारा जाऊंगा  
चुप रहकर , रोज-रोज-
मरने से तो बेहतर है ! 
किसी को मरते देख ,
किसी को मारते देख ,
आत्मचित्त , स्वार्थपूरित नेत्र 
अब मैं खोलूँगा , अब मैं बोलूँगा !

अपराध करना जुर्म है ,
तो जुर्म है उसे होने देना भी !
सिर्फ लच्छेदार भाषण ,
लम्बी लम्बी डींगे ...
नहीं नहीं... अब सहूंगा नहीं ,
न ही सहने दूंगा !

पकड़ लूँगा हाथ 
ग़र उठेगा किसी औरत पर ! 
छुड़ाउंगा मासूम बच्चों को 
जो शोषित हैं ,
शमित हैं , नहीं नहीं... 
वे बालश्रम से दमित हैं !
लूटने नहीं दूंगा 
अश्मिता अब किसी और की !
घटने नहीं दूंगा 
मान अपने बुजुर्गों का ! 
फूटने नहीं दूंगा 
भाग्य अपने भारत का !



तैनात रहूँगा 
हर समय , हर जगह !
अपनों को जोडूंगा 
बढ़ाऊंगा अपनी शक्ति !
लेकिन तमाशबीन , लाचार... 
..चाय की चुस्की और 
झूठी आह के साथ 
सबकुछ भूलकर 
स्वार्थ में पुनः 
डूब जाने की आदत !
अब मैं छोडूँगा !


करूँगा..लडूंगा..मरूँगा 
 पर चुप नहीं बैठूँगा !

अपने अधिकारों में 
कर्तब्यों को भी जोडूंगा !
 अब मैं बोलूँगा
आत्माचित्त , स्वार्थपूरित नेत्र 
अब मैं खोलूँगा !!

(फोटो : साभार गूगल इमेज )

Friday, April 22, 2011

आदमी....

रात अकेली नहीं होती ,
होते हैं ढेरों ख्वाब 
अकेला होता है गर कोई ,
तो आदमी !

उजाले में चमक नहीं होती ,
चमकते हैं तारे 
डूबता है गर कोई , 
तो आदमी !

झूठ , झूठा नहीं होता , 
होते है ढेरों सच 
झूठा होता है गर कोई ,
तो आदमी !

भाव बहते नहीं हैं ,
होता है ठहराव 
बहता है गर कोई ,
तो आदमी ! 

प्रेम मैला नहीं होता ,
होता है पावन 
मैला होता है गर कोई ,
तो आदमी ! 

काम छोटा नहीं होता ,
करने पर निर्भर है 
छोटा होता है गर कोई ,
तो आदमी ! 

दोष किसका नहीं होता ?
होता हम सबका 
पर बचता  है गर कोई ,
तो आदमी !!

Thursday, April 21, 2011

हमराही....

             मैंने ऐसा महसूस किया है की जब कभी भी हम किसी परेशानी में रहते हैं तो कोई न कोई हमें उस परेशानी से निकालने के लिए आ ही जाता है ! कभी किसी दोस्त के रूप में , तो कभी कभी किन्ही अन्य रूपों में ! दरअसल आज कल जीवन इतना संघर्ष मय हो गया है की बिना किसी के साथ जीवन जी पाना ही अपने आप में असंभव सा लगने लगा है ! ऐसे में तब और परेशानी होती है जब आप किसी लक्ष्य का पीछा करते हुए अपनों से इतना दूर हो जाएँ की चारों ओर अकेलापन और अजनबीपन ही आप के सहचर हो जाएँ ! तेजी से भागती इस दुनियां  में सफल होना भी कोई आसान काम नहीं है ! चारों ओर गलाकाट प्रतियोगिता है ! कई बार मनचाही सफलता नहीं मिलती या मिलने में बहुत ज्यादा समय लग जाता है , ऐसे में अकेले जीवन जीना मौत से भी बदतर जान पड़ता है और तभी किसी सच्चे दोस्त या हमराही की जरुरत होती है ! 
                
                       बहुत ही कम ऐसे लोग होते हैं जिन्हें कोई सच्चा साथी मिल पाता है नहीं तो अधिकतर सिर्फ निजी स्वार्थपूर्ति और अपनी बेहतरी के लिए ही आप से जुड़ना  चाहते हैं ! ऐसे में अगर कोई किसी से सच्चा प्यार कर बैठे और बदले में उसे भी सच्चा प्यार मिले , दोनों एक दुसरे के सुख- दुःख , सफलता -असफलता में साथ दें, तथा इस कष्टकारी जीवन को थोडा सा भी मधुर एवं जीने योग्य बना पायें, तो इसमें क्या हर्ज है ! हमें समझाना होगा की आज की आवश्यकता भी यही है इसलिए ऐसे रिश्तों को गलत न समझते हुए इन्हें स्वीकार करना होगा और ऐसे लोगों के प्रति सदभावनाएँ भी दिखानी होंगी ! हम सभी मिलकर इस जीवन को हर्ष के साथ जीने में आपनी भूमिका को समझे और उसे निभाएं !!

Tuesday, April 12, 2011

राम नवमी ...


आप सभी हिंदी ब्लॉग  परिवार के सदस्यों को राम नवमी की ढेर सारी शुभकामनायें !!!
भगवान राम हम सभी को सदाचारी बनने में मदद  करें !!!! 

Monday, April 11, 2011

संकल्प .....

             अब जब की पूरा देश अन्ना हजारे के साथ भ्रष्टाचार के खिलाफ आन्दोलन में शामिल है तब अनायास ही मेरे मन में एक बात बार बार आती है ! आखिर जब  हम सब सरकार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं और जनलोकपाल विधेयक को पारित करवाने के लिए सरकार के उपर दबाव डाल रहे हैं तो हमें अपनी अपनी भूमिकाओं के बारे में भी सोचना होगा ! अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में हम सभी किसी न किसी रूप में इस भ्रष्टाचार में शामिल हैं ! हम किसी भी काम के लिए तुरंत पैसे , पावर या पहचान का इस्तेमाल करने के लिए आतुर रहते हैं और प्रक्रिया का पालन न करने में अपनी महानता समझते हैं ! ऐसे अनेकों उदहारण देखे जा सकते हैं , जैसे जब हम ट्रेन में सफ़र करते हैं और टिकट नहीं मिलता तो हम टी. टी. को पैसे देकर सीट ले लेते हैं और सीट के असली हक़दार को सीट नहीं मिलती ! जब हम किसी काम के लिए सरकारी कार्यालय में जाते हैं तो लाइन में खड़ा होने की बजाय अपनी पहचान का फायदा उठाकर सबसे पहले अपना काम करा लेते हैं या जब हम ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन में पकड़े जाते हैं तब भी हम ऐसे ही हथकंडे अपनाते हैं ! ऐसे अनेको उदहारण हैं ! 
           ऐसे में प्रश्न यह उठता है की क्या सिर्फ कुछ नेताओं और कुछ सरकारी अधिकारियों के ऊपर लगाम लगाकर हम इस देश को भ्रष्टाचार से मुक्त कर सकते हैं ? मेरा मानना है की नहीं, हम ऐसा नहीं कर सकते ! क्यूंकि  इस देश के १२१ करोड़ लोगों में से १ प्रतिशत से भी कम लोग ऐसे पदों पर कार्यरत हैं ! और उस से भी बड़ी बात यह की ये सभी हमारे आप में से ही हैं ! अतः जब तक हम सभी अपनी स्वयं की भूमिका का मूल्याङ्कन नहीं करते और अपने आप में सुधार नहीं लाते हैं तब तक इस मुसीबत से छुटकारा पाना संभव नहीं लगता ! हम सभी को नियमों का पालन करना होगा और किसी से भी कोई नाजायज फायदा लेने की कोशिश पर  लगाम लगानी होगी साथ ही अपने कामों में ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ साथ पारदर्शिता भी लानी होगी , तभी हम नेताओं या अधिकारियों के बिरुद्ध आवाज उठाने के लायक हो पाएंगे अन्यथा यह सिर्फ एक दिखावा और हवाओं के साथ बहने के बराबर ही रहेगा ! कोई तात्विक परिणाम की प्राप्ति असंभव ही होगी ! अब समय आ गया है जब उंगली सिर्फ दूसरों की ओर नहीं बल्कि अपनी ओर उठानी होगी और अपने में सुधार करते हुए फिर दूसरों को सुधार के लिए प्रेरित और मजबूर करने का प्रयास करना होगा !!
              मैंने ऐसे ही संकल्प लिए हैं ! तभी आप से कुछ कह सकने की हिम्मत जुटा पाया हूँ ! आप के द्वारा  लिए गए संकल्पों से कुछ और सीखने और सुधारने की उत्कंठा के साथ आप के सुझावों का इंतज़ार रहेगा !!!

Sunday, April 10, 2011

राष्ट्र के नाम सन्देश...

जिंदाबाद ! जिंदाबाद ! ये करप्सन जिंदाबाद!!
भाइयों एवं बहनों ,

आज हम आप से वादा करते हैं की अब जब भी कोई नेता घोटाला करेगा तो हम उसे तिहाड़ रत्न से नवाजेंगे !
साथ ही हमारी पार्टी ऐसे किसी भी नेता को जो आज तक कोई बड़ा घोटाला करने में असमर्थ रहा है ,,मंत्रिमंडल में न सिर्फ शामिल करेगी बल्कि सर्वश्रेष्ठ भ्रष्ट नौकरशाह भी उपलब्ध कराएगी ताकि हम अपने समावेशी विकास  के लक्ष्य को प्राप्त कर सके ! जैसा की हमने आप से वादा किया था की जब हम सत्ता में दुबारा आयेंगे तो ऐसा कोई मौका नहीं छोड़ेंगे जिससे की देश का सम्मान गिरे ! इसीलिए हमने कामनवेल्थ खेलों में जी भरकर घोटाले करने की छुट दी , साथ ही हमने घोटालों की एक नयी प्रजाति भी विकसित की जिसे आदर्श घोटाला नाम दिया गया ! जैसा की आप सभी जानते हैं की हमने अपने मंत्रिमंडल में राजाओं को भी जगह दी तथा उन्हें स्पेक्ट्रम रूपी कामधेनु भी उपलब्ध करायी गयी जिससे उन्होंने लगभग ३००० करोड़ रुपये रिश्वतराजस्व प्राप्त किया ! हमें बहुत गर्व है की हमने रतननील  रूपी दैत्यों के  साथ मिलकर राडियादूरसंचार यन्त्र से सरकारी राजस्व को १७६००० करोड़ रुपये का नुकसान कराया ! यही नहीं हमने सभी को अवसर देने की अपनी योजना के तहत महादागी थामस को सीवीसी तक बनाया ! हमें पता है की आप सभी हमें अपना साथ देते रहेंगे और हम इस देश को लुटते हुए ९ % वृद्धि दर के साथ गर्त में चलते जायेंगे !!!

 आप सभी का ईमानदार नेता जिसे कुछ नहीं पता -

 गुड़ गोबर सिंह 

हवाला की जय....

जनता का भी डर नहीं 
कानून का भी डर नहीं ,
भरते जाओ जेबों में धन काला 
बोलो जय हवाला ,,
बोलो जय हवाला दिन दहाड़े हेरा फेरी
 बोलो जय हवाला !!!


Friday, March 4, 2011

Kavi Shivam Mishra

Thursday, March 3, 2011

प्रिय ....

स्नेहिल छुअन की अभिलाषा ,
मनमीत से मिलने की आशा ,
ले दूर तलक मैं आया हूँ ,
मैं प्रेम पुजारी हूँ प्यासा !!

प्रिय के प्रति पूर्ण समर्पण है ,
जो कुछ मेरा सब अर्पण है ,
मैंने खुद को उनमें है पाया ,
प्रिय ही तो मेरा दर्पण है !!

नख-शिख सौंदर्य समाया है ,
मन निर्मल, निश्छल पाया है ,
मैं मोहित,मुदित हूँ मतवाला ,
प्रिय प्रेम मेरे मन भाया है !!

निजहित मे नहीं है हित मेरा ,
जग हित  का लक्ष्य रहा मेरा , 
प्रिय लक्ष्य मे मेरे, साथ रहा ,
मैं धन्य हुआ पा, संग तेरा !!
मैं धन्य हुआ पा, संग तेरा !! 

Friday, February 11, 2011

माटी के लाल.....

देखा मैंने आज जिसे ,
कहते माटी का लाल उसे  !!

मानवता की रक्षा करता ,
ह्रदय हर्ष देकर दुःख हरता!
निर्मल निश्छल निः स्वार्थ भाव से ,
जन जन की है सेवा करता !

कृषि कर्म में रत रहता ,
ना आती कोई चाल उसे !
सरल सहज जीवन जीता ,
कहते माटी का लाल उसे !!

गुज़र बसर करने की खातिर ,
वह लाखों कष्ट उठाता  है !
वो भरता पेट सभी का ,
और खुद भूखा सो जाता है !

बेटी का ब्याह न करने का ,
है रहता सदा मलाल उसे !
सर झुक जाने का भय रहता ,
कहते माटी का लाल उसे !!

सहज सभी संघर्ष सहन की,
छमता कहाँ  से आती है ?
जाँबाज किसान की व्यथा देख ,
यह धरती भी सकुचाती है !

मर जाने को उकसाता है ,
नित-नित बढ़ता ऋण जाल उसे !
नत-मस्तक होता मैं जिस पर ,
कहते माटी का लाल उसे !!