Saturday, April 30, 2011

हैं सभी अपने ...

सहनशील , सृजनशील...
..संघर्षशील नारी की ,
 दुःख भरी दास्ताँ !
हो कोई भी रूप ,
सिर्फ धूप ही धूप !
हैं सभी अपने ....
पर नहीं किसी को वास्ता !
नारी की दुःख भरी दास्ताँ !!

कभी परिवार के लिए, 
कभी समाज के लिए !
कभी कल के लिए... 
..तो कभी आज के लिए ! 
करती आयी है त्याग ,
सहती आयी है आग !
चलती है , रुकती है ,
बदल देती है रास्ता !
हैं सभी अपने .... 
पर नहीं किसी को वास्ता !
नारी की दुःख भरी दास्ताँ !!

कभी पिता की आन के लिए ,
कभी पति की शान के लिए !
कभी बेटे की जान के लिए ...
..तो कभी बेटी के मान के लिए !
देती आयी है बलिदान ,
सहती आयी है अपमान !
रोती है , घुटती है ,
समय भी, उसे है फांसता !
हैं सभी अपने ....
पर नहीं किसी को वास्ता !
नारी की दुःख भरी दास्ताँ !!

Friday, April 29, 2011

अब मैं बोलूँगा...

बस...बस !! अब मैं बोलूँगा  
नहीं रोकूंगा खुद को 
डरूँगा नहीं , लडूंगा !
अब अपनी बंद आँखें खोलूँगा ! 

हर्ज नहीं ग़र मारा जाऊंगा  
चुप रहकर , रोज-रोज-
मरने से तो बेहतर है ! 
किसी को मरते देख ,
किसी को मारते देख ,
आत्मचित्त , स्वार्थपूरित नेत्र 
अब मैं खोलूँगा , अब मैं बोलूँगा !

अपराध करना जुर्म है ,
तो जुर्म है उसे होने देना भी !
सिर्फ लच्छेदार भाषण ,
लम्बी लम्बी डींगे ...
नहीं नहीं... अब सहूंगा नहीं ,
न ही सहने दूंगा !

पकड़ लूँगा हाथ 
ग़र उठेगा किसी औरत पर ! 
छुड़ाउंगा मासूम बच्चों को 
जो शोषित हैं ,
शमित हैं , नहीं नहीं... 
वे बालश्रम से दमित हैं !
लूटने नहीं दूंगा 
अश्मिता अब किसी और की !
घटने नहीं दूंगा 
मान अपने बुजुर्गों का ! 
फूटने नहीं दूंगा 
भाग्य अपने भारत का !



तैनात रहूँगा 
हर समय , हर जगह !
अपनों को जोडूंगा 
बढ़ाऊंगा अपनी शक्ति !
लेकिन तमाशबीन , लाचार... 
..चाय की चुस्की और 
झूठी आह के साथ 
सबकुछ भूलकर 
स्वार्थ में पुनः 
डूब जाने की आदत !
अब मैं छोडूँगा !


करूँगा..लडूंगा..मरूँगा 
 पर चुप नहीं बैठूँगा !

अपने अधिकारों में 
कर्तब्यों को भी जोडूंगा !
 अब मैं बोलूँगा
आत्माचित्त , स्वार्थपूरित नेत्र 
अब मैं खोलूँगा !!

(फोटो : साभार गूगल इमेज )

Friday, April 22, 2011

आदमी....

रात अकेली नहीं होती ,
होते हैं ढेरों ख्वाब 
अकेला होता है गर कोई ,
तो आदमी !

उजाले में चमक नहीं होती ,
चमकते हैं तारे 
डूबता है गर कोई , 
तो आदमी !

झूठ , झूठा नहीं होता , 
होते है ढेरों सच 
झूठा होता है गर कोई ,
तो आदमी !

भाव बहते नहीं हैं ,
होता है ठहराव 
बहता है गर कोई ,
तो आदमी ! 

प्रेम मैला नहीं होता ,
होता है पावन 
मैला होता है गर कोई ,
तो आदमी ! 

काम छोटा नहीं होता ,
करने पर निर्भर है 
छोटा होता है गर कोई ,
तो आदमी ! 

दोष किसका नहीं होता ?
होता हम सबका 
पर बचता  है गर कोई ,
तो आदमी !!

Thursday, April 21, 2011

हमराही....

             मैंने ऐसा महसूस किया है की जब कभी भी हम किसी परेशानी में रहते हैं तो कोई न कोई हमें उस परेशानी से निकालने के लिए आ ही जाता है ! कभी किसी दोस्त के रूप में , तो कभी कभी किन्ही अन्य रूपों में ! दरअसल आज कल जीवन इतना संघर्ष मय हो गया है की बिना किसी के साथ जीवन जी पाना ही अपने आप में असंभव सा लगने लगा है ! ऐसे में तब और परेशानी होती है जब आप किसी लक्ष्य का पीछा करते हुए अपनों से इतना दूर हो जाएँ की चारों ओर अकेलापन और अजनबीपन ही आप के सहचर हो जाएँ ! तेजी से भागती इस दुनियां  में सफल होना भी कोई आसान काम नहीं है ! चारों ओर गलाकाट प्रतियोगिता है ! कई बार मनचाही सफलता नहीं मिलती या मिलने में बहुत ज्यादा समय लग जाता है , ऐसे में अकेले जीवन जीना मौत से भी बदतर जान पड़ता है और तभी किसी सच्चे दोस्त या हमराही की जरुरत होती है ! 
                
                       बहुत ही कम ऐसे लोग होते हैं जिन्हें कोई सच्चा साथी मिल पाता है नहीं तो अधिकतर सिर्फ निजी स्वार्थपूर्ति और अपनी बेहतरी के लिए ही आप से जुड़ना  चाहते हैं ! ऐसे में अगर कोई किसी से सच्चा प्यार कर बैठे और बदले में उसे भी सच्चा प्यार मिले , दोनों एक दुसरे के सुख- दुःख , सफलता -असफलता में साथ दें, तथा इस कष्टकारी जीवन को थोडा सा भी मधुर एवं जीने योग्य बना पायें, तो इसमें क्या हर्ज है ! हमें समझाना होगा की आज की आवश्यकता भी यही है इसलिए ऐसे रिश्तों को गलत न समझते हुए इन्हें स्वीकार करना होगा और ऐसे लोगों के प्रति सदभावनाएँ भी दिखानी होंगी ! हम सभी मिलकर इस जीवन को हर्ष के साथ जीने में आपनी भूमिका को समझे और उसे निभाएं !!

Tuesday, April 12, 2011

राम नवमी ...


आप सभी हिंदी ब्लॉग  परिवार के सदस्यों को राम नवमी की ढेर सारी शुभकामनायें !!!
भगवान राम हम सभी को सदाचारी बनने में मदद  करें !!!! 

Monday, April 11, 2011

संकल्प .....

             अब जब की पूरा देश अन्ना हजारे के साथ भ्रष्टाचार के खिलाफ आन्दोलन में शामिल है तब अनायास ही मेरे मन में एक बात बार बार आती है ! आखिर जब  हम सब सरकार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं और जनलोकपाल विधेयक को पारित करवाने के लिए सरकार के उपर दबाव डाल रहे हैं तो हमें अपनी अपनी भूमिकाओं के बारे में भी सोचना होगा ! अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में हम सभी किसी न किसी रूप में इस भ्रष्टाचार में शामिल हैं ! हम किसी भी काम के लिए तुरंत पैसे , पावर या पहचान का इस्तेमाल करने के लिए आतुर रहते हैं और प्रक्रिया का पालन न करने में अपनी महानता समझते हैं ! ऐसे अनेकों उदहारण देखे जा सकते हैं , जैसे जब हम ट्रेन में सफ़र करते हैं और टिकट नहीं मिलता तो हम टी. टी. को पैसे देकर सीट ले लेते हैं और सीट के असली हक़दार को सीट नहीं मिलती ! जब हम किसी काम के लिए सरकारी कार्यालय में जाते हैं तो लाइन में खड़ा होने की बजाय अपनी पहचान का फायदा उठाकर सबसे पहले अपना काम करा लेते हैं या जब हम ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन में पकड़े जाते हैं तब भी हम ऐसे ही हथकंडे अपनाते हैं ! ऐसे अनेको उदहारण हैं ! 
           ऐसे में प्रश्न यह उठता है की क्या सिर्फ कुछ नेताओं और कुछ सरकारी अधिकारियों के ऊपर लगाम लगाकर हम इस देश को भ्रष्टाचार से मुक्त कर सकते हैं ? मेरा मानना है की नहीं, हम ऐसा नहीं कर सकते ! क्यूंकि  इस देश के १२१ करोड़ लोगों में से १ प्रतिशत से भी कम लोग ऐसे पदों पर कार्यरत हैं ! और उस से भी बड़ी बात यह की ये सभी हमारे आप में से ही हैं ! अतः जब तक हम सभी अपनी स्वयं की भूमिका का मूल्याङ्कन नहीं करते और अपने आप में सुधार नहीं लाते हैं तब तक इस मुसीबत से छुटकारा पाना संभव नहीं लगता ! हम सभी को नियमों का पालन करना होगा और किसी से भी कोई नाजायज फायदा लेने की कोशिश पर  लगाम लगानी होगी साथ ही अपने कामों में ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ साथ पारदर्शिता भी लानी होगी , तभी हम नेताओं या अधिकारियों के बिरुद्ध आवाज उठाने के लायक हो पाएंगे अन्यथा यह सिर्फ एक दिखावा और हवाओं के साथ बहने के बराबर ही रहेगा ! कोई तात्विक परिणाम की प्राप्ति असंभव ही होगी ! अब समय आ गया है जब उंगली सिर्फ दूसरों की ओर नहीं बल्कि अपनी ओर उठानी होगी और अपने में सुधार करते हुए फिर दूसरों को सुधार के लिए प्रेरित और मजबूर करने का प्रयास करना होगा !!
              मैंने ऐसे ही संकल्प लिए हैं ! तभी आप से कुछ कह सकने की हिम्मत जुटा पाया हूँ ! आप के द्वारा  लिए गए संकल्पों से कुछ और सीखने और सुधारने की उत्कंठा के साथ आप के सुझावों का इंतज़ार रहेगा !!!

Sunday, April 10, 2011

राष्ट्र के नाम सन्देश...

जिंदाबाद ! जिंदाबाद ! ये करप्सन जिंदाबाद!!
भाइयों एवं बहनों ,

आज हम आप से वादा करते हैं की अब जब भी कोई नेता घोटाला करेगा तो हम उसे तिहाड़ रत्न से नवाजेंगे !
साथ ही हमारी पार्टी ऐसे किसी भी नेता को जो आज तक कोई बड़ा घोटाला करने में असमर्थ रहा है ,,मंत्रिमंडल में न सिर्फ शामिल करेगी बल्कि सर्वश्रेष्ठ भ्रष्ट नौकरशाह भी उपलब्ध कराएगी ताकि हम अपने समावेशी विकास  के लक्ष्य को प्राप्त कर सके ! जैसा की हमने आप से वादा किया था की जब हम सत्ता में दुबारा आयेंगे तो ऐसा कोई मौका नहीं छोड़ेंगे जिससे की देश का सम्मान गिरे ! इसीलिए हमने कामनवेल्थ खेलों में जी भरकर घोटाले करने की छुट दी , साथ ही हमने घोटालों की एक नयी प्रजाति भी विकसित की जिसे आदर्श घोटाला नाम दिया गया ! जैसा की आप सभी जानते हैं की हमने अपने मंत्रिमंडल में राजाओं को भी जगह दी तथा उन्हें स्पेक्ट्रम रूपी कामधेनु भी उपलब्ध करायी गयी जिससे उन्होंने लगभग ३००० करोड़ रुपये रिश्वतराजस्व प्राप्त किया ! हमें बहुत गर्व है की हमने रतननील  रूपी दैत्यों के  साथ मिलकर राडियादूरसंचार यन्त्र से सरकारी राजस्व को १७६००० करोड़ रुपये का नुकसान कराया ! यही नहीं हमने सभी को अवसर देने की अपनी योजना के तहत महादागी थामस को सीवीसी तक बनाया ! हमें पता है की आप सभी हमें अपना साथ देते रहेंगे और हम इस देश को लुटते हुए ९ % वृद्धि दर के साथ गर्त में चलते जायेंगे !!!

 आप सभी का ईमानदार नेता जिसे कुछ नहीं पता -

 गुड़ गोबर सिंह 

हवाला की जय....

जनता का भी डर नहीं 
कानून का भी डर नहीं ,
भरते जाओ जेबों में धन काला 
बोलो जय हवाला ,,
बोलो जय हवाला दिन दहाड़े हेरा फेरी
 बोलो जय हवाला !!!