Thursday, April 21, 2011

हमराही....

             मैंने ऐसा महसूस किया है की जब कभी भी हम किसी परेशानी में रहते हैं तो कोई न कोई हमें उस परेशानी से निकालने के लिए आ ही जाता है ! कभी किसी दोस्त के रूप में , तो कभी कभी किन्ही अन्य रूपों में ! दरअसल आज कल जीवन इतना संघर्ष मय हो गया है की बिना किसी के साथ जीवन जी पाना ही अपने आप में असंभव सा लगने लगा है ! ऐसे में तब और परेशानी होती है जब आप किसी लक्ष्य का पीछा करते हुए अपनों से इतना दूर हो जाएँ की चारों ओर अकेलापन और अजनबीपन ही आप के सहचर हो जाएँ ! तेजी से भागती इस दुनियां  में सफल होना भी कोई आसान काम नहीं है ! चारों ओर गलाकाट प्रतियोगिता है ! कई बार मनचाही सफलता नहीं मिलती या मिलने में बहुत ज्यादा समय लग जाता है , ऐसे में अकेले जीवन जीना मौत से भी बदतर जान पड़ता है और तभी किसी सच्चे दोस्त या हमराही की जरुरत होती है ! 
                
                       बहुत ही कम ऐसे लोग होते हैं जिन्हें कोई सच्चा साथी मिल पाता है नहीं तो अधिकतर सिर्फ निजी स्वार्थपूर्ति और अपनी बेहतरी के लिए ही आप से जुड़ना  चाहते हैं ! ऐसे में अगर कोई किसी से सच्चा प्यार कर बैठे और बदले में उसे भी सच्चा प्यार मिले , दोनों एक दुसरे के सुख- दुःख , सफलता -असफलता में साथ दें, तथा इस कष्टकारी जीवन को थोडा सा भी मधुर एवं जीने योग्य बना पायें, तो इसमें क्या हर्ज है ! हमें समझाना होगा की आज की आवश्यकता भी यही है इसलिए ऐसे रिश्तों को गलत न समझते हुए इन्हें स्वीकार करना होगा और ऐसे लोगों के प्रति सदभावनाएँ भी दिखानी होंगी ! हम सभी मिलकर इस जीवन को हर्ष के साथ जीने में आपनी भूमिका को समझे और उसे निभाएं !!

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