Monday, May 16, 2011

यकीं है ख़ुद को कि ...

बहुत सोचा , बहुत समझा ,
मैं लेकिन सह नहीं पाया !
बिना देखे उसे , इक दिन ,
मगर मैं रह नहीं पाया !!

दिखाए ख्वाब उसने ,
जश्ने - ज़न्नत के , मुझे लेकिन !
हक़ीकत मैं उन्हें फिर भी ,
 कभी भी कर नहीं पाया !!

पहेली बनके रह गयी है ,
 देखो... ज़िन्दगी मेरी !
कि क़िस्मत ने दगा इक बार ,
 फिर मुझसे है फरमाया !!

वे कहते हैं मुसीबत , यूँ ही ,
 टल जाएगी.. ऐ मेरे दोस्त !
मुझे भी है यकीं , क्यूंकि ,
साथ मेरे , मेरे अपनों का है साया !!

ज़माने से नहीं सिकवा ,
शिकायत है न गैरों से !
ख़ुद ही को कोसता हूँ ,
दिल की मैं अपने , सुन नहीं पाया !!

अभी भी इल्म है मुझको ,
 कि मंजिल है मेरी मुमकिन !
दुखों के बादलों संग मैं ,
 अभी भी बह नहीं पाया !!

यकीं है ख़ुद को कि ,
इकदिन सितारा मेरा चमकेगा !
शख्सियत की बुलंदी का ख़जाना ,
मेरे फिर , काम है आया !!

Tuesday, May 10, 2011

माँ बिन बालक ...

मात - स्नेह - वंचन से आहत ,
मात - स्नेह की अविरल चाहत ,
पाले.. मन में नन्हां बालक ,
तड़प रहा जीवन में नाहक !

बिन माँ , बालक की जो दशा है ,
आखेटक की जाल में जैसे फंसा है ,
दिन - दिन रोता याद न जाती ,
मात - मिलन का एक नशा है !

देख विधाता ! माँ की महिमा ,
तुझसे ऊपर माँ की गरिमा ,
स्नेहातुर बालक पर तू दया कर ,
पुनः न माँ बालक को जुदा कर !

माँ के दुःख भी आसीम निरंतर ,
माँ न करे संतानों में अंतर ,
पर्याय बन चुके जैसे माँ - दुःख ,
स्वप्न में भी ना मिलता है सुख !

आओ उस बालक से सीखें ,
बिन माँ हम सब उसी सरीखे ,
माँ का मान हो सबसे पहले ,
ईश्वर ! माँ के सब दुःख हर ले !

प्रेम से मीठी - मीठी बातें ,
बढ़ी उम्र की हैं सौगातें ,
इतना ही बस हमको करना ,
पड़े न माँ से हमें बिछड़ना !! 

Sunday, May 8, 2011

ज़ालिम ये जिंदगी ...

ज़ालिम ये जिंदगी , ग़मों का सैलाब लाती है !
ज़ालिम ये जिंदगी , ग़मों का सैलाब लाती है !
रुलाती है ज्यादा , और थोड़ा हंसाती है !
कहते हैं सभी , कि खुश रहो यारों ,
पर कौन बताये हमें , ये खुशी कहाँ से आती है ?

बड़ी उम्मीद से , कदम हम जहाँ में रखते हैं !
बड़ी उम्मीद से , कदम हम जहाँ में रखते हैं !
आखिर में, इन्हीं उम्मीदों के , बोझ तले दबते हैं !
कहते हैं , सपने बड़े देखा करो ,
कम्बख्त सपने , क्या पेट भरा करते हैं ?

ख़ुदा अपने बन्दों का इम्तिहान लेता है !
ख़ुदा अपने बन्दों का इम्तिहान लेता है ! 
छोटी सी जिंदगी भी , टुकड़ों में देता है !
कहते हैं , ख़ुदा का रहमों करम है सब ,
ग़मों से जूझने की ताकत भी , खुदा ही तो देता है !

हमारी ख्वाहिशें गर , खुद में सिमट जाएँ , तो क्या करें ?
हमारी ख्वाहिशें गर , खुद में सिमट जाएँ तो , क्या करें ?
सभी को भूल कर , सब खुद पे लुटाएं , तो क्या करें ?
बहुत कुछ रख के भी , ख़ाली ही जायेगा ,ऐ मेरे दोस्त !
जो इंसान से हैवान बनाये , ऐसी दौलत का क्या करें ?

Friday, May 6, 2011

आस लगी है...

आस लगी है दिल में मेरे , 
प्रिय तुम वापस आओगे !
प्रीत मेरे तुम , मीत तेरा मैं ,
मुझको गले लगाओगे !

जब से मुझ से दूर गए तुम ,
एक पल चैन नहीं पाया !
रोया हूँ , मैं तड़पा  हूँ मैं ,
विरह ने खूब है तरसाया ! 

छोड़ दिया जग सारा मैंने ,
प्रिय तुम तो अपनाओगे !
भूली बिसरी यादें सारी ,
ले तुम वापस आओगे !

आस लगी है दिल में मेरे ,
प्रिय तुम वापस आओगे !
प्रीत मेरे तुम , मीत तेरा मैं ,
मुझको गले लगाओगे !

प्यार भरे दिन याद करूँ जब ,
आँख मेरी भर आती है !
दिल में संजो के रखी मैंने ,
स्नेह की पहली पाती है !

पूंछूं रोज , हे ! विरह के बादल ,
कब तुम लौट के जाओगे ?
आयेंगे जब प्रियतम मेरे ,
प्रेम सुधा बरसाओगे ?

आस लगी है दिल में मेरे ,
प्रिय तुम वापस आओगे !
प्रीत मेरे तुम , मीत तेरा मैं ,
मुझको गले लगाओगे !

उनकी मींठी मींठी बातें ,
सुनकर मैं इठलाता था !
रूठ अगर वो मुझसे जातीं ,
ह्रदय से उन्हें मनाता था !

भाव भंवर में फसा हुआ हूँ ,
कब आ मुझे सम्हालोगे ?
देर न कर मर जाऊंगा मैं ,
फिर तुम भी पछताओगे ?
शिवम् सहज ही कहे ये तुमसे ,
ऐसा प्रेम न पाओगे !

आस लगी है दिल में मेरे ,
प्रिय तुम वापस आओगे !
प्रीत मेरे तुम  मीत तेरा मैं , 
मुझको गले लगाओगे !!

आस लगी है दिल में मेरे ....







Thursday, May 5, 2011

ओसामा की मौत का आकर्षण ...

                अब जब चारों ओर ओसामा और ओबामा के चर्चे चल ही रहे हैं तो आखिर मैं अपने आप को कब तक रोक पाता , अतः मैंने भी सोचा चलो कुछ तो लिख ही सकते हैं इन दो महानुभाओं के बारे में !

               दरअसल जब से ओसामा बिन लादेन की मौत की खबर आयी है तभी से अलग अलग वर्ग के लोग अलग अलग तरीके से इस खबर को प्रयोग करने में लगे हुए हैं ! कई लोगों के लिए तो ऐसी खबरें रोजगार के अछे खासे अवसर लेकर आती हैं ! प्रिंट मीडिया से लेकर इलेक्ट्रोनिक मीडिया, एवं इन्टरनेट सभी जगहों पर दिन भर सिर्फ एक ही खबर "ओबामा किल्ड ओसामा" ! हद तो तब हो गयी जब एक ऑनलाइन अखबार ने ओसामा की जगह ओबामा की मौत की खबर छाप दी ! हालाँकि ओसामा की मरने की खबर मुझे पहले ही मिल चुकी थी लेकिन जैसे ही मैंने ओबामा के मरने की गलत खबर पढ़ी , मैं तो दंग रह गया अल कायदा की तीव्र प्रतिक्रिया और प्रतिशोध के बारे में सोचकर ! राहत की बात यह थी की मुझे यह समझते देर नहीं लगी की यह सिर्फ होड़बाजी में गलत लिखे जाने का मामला है ! 

                हाँ तो माफ़ कीजिये मैं अपने विषय से थोडा भटक गया था ! मैं बात कर रहा था रोजगार की , सभी टी. वी. चैनलों पर कई सारे विशेषज्ञ एकाएक पधार बैठे और अमेरिका-भारत-पाकिस्तान जैसे देशों पर इस घटना से पड़ने वाले प्रभावों पर अपनी अपनी दलीलें देने लगे ! बात कभी पाकिस्तान के बेनकाब होने को लेकर होती तो कभी भारत के दावे के मजबूत होने की ! लेकिन असल बात तो इन सभी की जेबों में अच्छी खासी रकम भरने की थी जिस पर किसी ने भी चर्चा नहीं किया ! इस पूरे घटनाक्रम में हमारे एक महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील राज्य अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के गायब होने की खबर तो स्वयं ही गायब हो गयी ! 

               पहले तो यह संदेह भी किया गया की क्या ओसामा बिन लादेन वास्तव में मारा भी गया है  या नहीं ? फिर , की क्या सच में पाकिस्तान को इस ऑपरेशन में शामिल किया नहीं किया गया था ? क्या पाकिस्तान को सच में नहीं पता था की ओसामा बिन लादेन वहां पिछले लम्बे समय से रह रहा था ? आदि ! मैं भी इस प्रमुख समाचार को तभी से फ़ॉलो कर रहा  हूँ ! कुछ ऐसी बातें मेरे मन में आ रही थी जिनकी तलाश मैं किसी और के विचारों  में कर रहा था की कोई यदि उन मुद्दों पर बोल दे तो मेरे पेट की पीड़ा शांत हो जाये और मुझे इस खबर पर लिखने की हाड़तोड़ मेहनत न करनी पड़े ! लेकिन शायद विधाता को मेरा आराम रास नहीं आ रहा था अतः किसी ने भी इन मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया ! यहाँ मैं उन बातों को या सही अर्थों में कहें तो मेरे मन की शंकाओं को संक्षेप में बताना चाहूँगा !

                 जब ये सारी बातें हो रही थीं  कि , पाकिस्तान को इस ऑपरेशन के बारे में कोई जानकारी नहीं थी , और उधर अमेरिका ने सारा श्रेय अपने माथे  पर ले लिया तो अचानक मेरे मन में बात आयी की ऐसा भी हो सकता है की पाकिस्तान की भूमिका ओसामा को मारने में रही हो लेकिन पाकिस्तान को आतंकवादियों के हमले से बचाने के लिए रणनीतिक रूप से अमेरिका ने पाकिस्तान की भूमिका को नकारा और पाकिस्तान भी इस से पल्ला झाड़ते हुए दिखाई दिया ! हम सभी जानते हैं की लादेन की मौत का बदला आतंकवादी जरूर लेंगे लेकिन यह बदला अमेरिका की बजाय पाकिस्तान से लेना ज्यादा आसान है क्यूंकि पाकिस्तान में ऐसी घटनाएँ रोजमर्रा की बात हो गयी हैं ! ऐसे में यदि यह बात सामने आ जाती की पाकिस्तान ने लादेन के मारे जाने में अमेरिका का साथ दिया है तो पाकिस्तान पर ऐसे आतंकी हमलों की संभावनाएं ज्यादा बढ सकती हैं ! अंत में मेरा विश्लेषण यह है इन्ही कारणों से पाकिस्तान को इस ऑपरेशन से अलग बताया जा रहा है ! 

                  दूसरी ओर अब अमेरिका द्वारा ऑपरेशन और लादेन की तस्वीरें जारी न किये जाने की भी खबरें आ रही हैं , जिसके पीछे कारण यह बताया जा रहा है कि ऐसी तस्वीरों से प्रतिशोध की घटनाओं  को बल मिलेगा ! पुनः यह सारा प्रकरण इस पुरे ऑपरेशन पर ही संदेह का आवरण चढ़ा देता है क्यूंकि जो कारण दिया जा रहा है वह उतना तार्किक नहीं दिखता क्यूंकि बदला लेने की घटनाएँ तो वैसे भी संभावित हैं ही ! दूसरी ओर इतनी बड़ी सफलता के सबूतों  को अमेरिका बाहर आने से क्यों रोक रहा है जब की यही अमेरिका इराक के सद्दाम हुसैन की फाँसी का लाइव विडियो टेप भी जारी कर चुका है !

                 ऐसा लगता है मैं भी कुछ ज्यादा ही विश्लेषक बनने की जुगत में लग गया , शायद कोई टी.वी. वाला बुला ले , लेकिन भैया ! हमारी ऐसी हैशियत कहाँ है ! हम तो ब्लागर हैं जिसे अपने लेख पढ़े जाने की संभावनाओं पर भी कम ही भरोसा रहता है ! आप इसे पढ़ लें , हम तो इसी से धन्य हैं ! धन्यवाद् !!!

Wednesday, May 4, 2011

धोखा....

दीवानों की महफ़िल में ,
देखो हम भी आ ही गए !
 ग़म भी हुआ हम हंसना भूले ,
आखिर धोखा खा ही गए !!

प्रथम दिवस के प्रथम मिलन की ,
याद हमें जब आती है !
रोम रोम में लहर ख़ुशी की ,
 मस्ती मन में छाती है !!

साथ जियेंगे, साथ मरेंगे , 
जीते जी हम जुदा  न होंगे !
दुश्मन हो चाहे सारा ज़माना , 
शीश प्रेम का झुकने न देंगे !!

सारी कसमें हमने खायीं ,
पर वो सितम  तो ढा ही गए !
ग़म भी हुआ हम हंसना भूले ,
आखिर धोखा खा ही गए !!

मधुर मुलाकातों के मौके ,
माघ महीने में मिलते थे !
उनकी सहज सुहानी सूरत ,
 पर बरबस ही हम मरते थे !!

सारे समय साथ उनका था ,
दोस्त यार की याद किसे थी !
जेब, जवानी जान उसे दी ,
फिक्र हमारी नहीं जिसे थी !!

हमने ह्रदय से जिसको चाहा ,
वे तो हमें भरमा ही गए !
ग़म भी हुआ, हम हंसना  भूले ,
आखिर धोखा खा ही गए !!

वे जब थे तो गम ही क्या था ?
बिन बोले ही हाल बयां था !
दिल दरिया था, सांसे सरगम ,
उनका हर एहसास जवां था !!

(अब जब वे नहीं हैं तब का हाल देखिये...... )

ताप धूप की तपिश बढ़ाती , 
प्रेम पवन भी रास न आती !
मद्धम-मद्धम बारिश की बूंदे ,
मन को मेरे नहीं लुभाती !!

समय चक्र ने करवट बदली ,
उड़ने की सजा हम पा ही गए ! 
ग़म भी हुआ हम हंसना भूले ,
आखिर धोखा खा ही गए !!

दीवानों की महफिल में , 
देखो हम भी आ ही गए !
ग़म भी हुआ हम हंसना भूले ,
आखिर धोखा खा ही गए !!

Tuesday, May 3, 2011

इलेक्सन गाथा ...

ई बार इलेक्सन क प्रकोप ,
फैलल बा कोने कोने में !
उत्तर प्रदेश से दिल्ली तक ,
मिलि गयल सुहागा सोने में !

जे मरा रहेन पुरखा सर्गे से ,
मुहर लई के आइ गएँन !
कोउ दस नाएंन, कोउ बीस नाएंन , 
कोउ पूरा सतक लगाई गएँन !

कुछ काम धाम कइके घर क ,
हमहूँ सोचा असनान करी !
ई चुनाव पावन पर्व अहै ,
चली के आपन मतदान करी !

जब पहुचि गए पोलिंग पर हम ,
एक जने से पर्ची पाई गए !
मन में कुछु भाव रहा अइसन ,
धीरे से हम ओलिआयि गए !

एक लरिका कहेसि सुना चच्चा ,
नहकई तकलीफ उठाय तूं !
ई बूथ केसरिया भय बाटई ,
का करई बदे यहं आय तूं !

यहं त बा एकदम रामराज्य ,
हम आपन फ़र्ज चुकाई दिहा !
तोहरई भर नाहीं, घरे भरे क , 
वोट सबेरहीं डालि दिहा !! 

                     (फोटो : गूगल इमेज से साभार )