Tuesday, May 3, 2011

इलेक्सन गाथा ...

ई बार इलेक्सन क प्रकोप ,
फैलल बा कोने कोने में !
उत्तर प्रदेश से दिल्ली तक ,
मिलि गयल सुहागा सोने में !

जे मरा रहेन पुरखा सर्गे से ,
मुहर लई के आइ गएँन !
कोउ दस नाएंन, कोउ बीस नाएंन , 
कोउ पूरा सतक लगाई गएँन !

कुछ काम धाम कइके घर क ,
हमहूँ सोचा असनान करी !
ई चुनाव पावन पर्व अहै ,
चली के आपन मतदान करी !

जब पहुचि गए पोलिंग पर हम ,
एक जने से पर्ची पाई गए !
मन में कुछु भाव रहा अइसन ,
धीरे से हम ओलिआयि गए !

एक लरिका कहेसि सुना चच्चा ,
नहकई तकलीफ उठाय तूं !
ई बूथ केसरिया भय बाटई ,
का करई बदे यहं आय तूं !

यहं त बा एकदम रामराज्य ,
हम आपन फ़र्ज चुकाई दिहा !
तोहरई भर नाहीं, घरे भरे क , 
वोट सबेरहीं डालि दिहा !! 

                     (फोटो : गूगल इमेज से साभार )



3 comments:

निर्मला कपिला said...

हम भी अपना फर्ज चिका दे रहे हैं। बढिया रचना। शुभकामनायें

शिवम मिश्र said...

Dhanyawad Nirmala ji.

Ashutosh Kumar Shukla said...

kya yar sambhu tumne to college ki yad diladi jab ham log sector 8 ke qtr. me ek saath the aur apne ye kavita sunai thi, hamari gujaris hai ki ap wo dusari wali bhi kavita apne blog pe post karo line hai" JAB CHITRAKUT SE RAMCHAND SAARI PRAJA LAUTAI DIHEN , PER HIJARA WAPAS NO BHAILAN AUR ASHAN WAHI JAMAI LIHEN"