Tuesday, May 10, 2011

माँ बिन बालक ...

मात - स्नेह - वंचन से आहत ,
मात - स्नेह की अविरल चाहत ,
पाले.. मन में नन्हां बालक ,
तड़प रहा जीवन में नाहक !

बिन माँ , बालक की जो दशा है ,
आखेटक की जाल में जैसे फंसा है ,
दिन - दिन रोता याद न जाती ,
मात - मिलन का एक नशा है !

देख विधाता ! माँ की महिमा ,
तुझसे ऊपर माँ की गरिमा ,
स्नेहातुर बालक पर तू दया कर ,
पुनः न माँ बालक को जुदा कर !

माँ के दुःख भी आसीम निरंतर ,
माँ न करे संतानों में अंतर ,
पर्याय बन चुके जैसे माँ - दुःख ,
स्वप्न में भी ना मिलता है सुख !

आओ उस बालक से सीखें ,
बिन माँ हम सब उसी सरीखे ,
माँ का मान हो सबसे पहले ,
ईश्वर ! माँ के सब दुःख हर ले !

प्रेम से मीठी - मीठी बातें ,
बढ़ी उम्र की हैं सौगातें ,
इतना ही बस हमको करना ,
पड़े न माँ से हमें बिछड़ना !! 

14 comments:

वन्दना said...

बहुत सुन्दर भावाव्यक्ति।

Udan Tashtari said...

बहुत उम्दा!!

shikha varshney said...

सुन्दर भावों की सुन्दर रचना.

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

बहुत सुंदर रचना .......हर पंक्ति ह्रदय छूने वाली है ......

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

Sundar...

............
तीन भूत और चार चुड़ैलें।!
14 सप्ताह का हो गया ब्लॉग समीक्षा कॉलम।

Kailash C Sharma said...

बहुत सुन्दर भावपूर्ण अभिव्यक्ति..

Akshita (Pakhi) said...

कित्ती खूबसूरत है यह रचना..बधाई.
_____________________________
पाखी की दुनिया : आकाशवाणी पर भी गूंजेगी पाखी की मासूम बातें

चैतन्य शर्मा said...

बहुत सुंदर कविता .... माँ अच्छा कोई नहीं ...

तरुण भारतीय said...

बिलकुल सही व सार्थक ,समर्पित ,व विचारणीय .मार्मिक पोस्ट है |.............माँ से बढकर इस दुनियां में कोई नही है |

रविकर said...

भिक्षाटन करता फिरे, परहित चर्चाकार |
इक रचना पाई इधर, धन्य हुआ आभार ||

http://charchamanch.blogspot.com/

S.M.HABIB said...

कितने सुन्दर भाव अभिव्यक्त हुए हैं... वाह!
सादर...

Shilpi Tiwari said...

ब्रह्म वाक्यों की गहन अभिव्यक्ति और शब्दों के साथ सार्थक न्याय!!!

आभार!!!

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत सुन्दर भावों से सजी अच्छी रचना

Dorothy said...

बेहद मार्मिक एवं संवेदनशील प्रस्तुति. आभार.
सादर,
डोरोथी.