Friday, May 6, 2011

आस लगी है...

आस लगी है दिल में मेरे , 
प्रिय तुम वापस आओगे !
प्रीत मेरे तुम , मीत तेरा मैं ,
मुझको गले लगाओगे !

जब से मुझ से दूर गए तुम ,
एक पल चैन नहीं पाया !
रोया हूँ , मैं तड़पा  हूँ मैं ,
विरह ने खूब है तरसाया ! 

छोड़ दिया जग सारा मैंने ,
प्रिय तुम तो अपनाओगे !
भूली बिसरी यादें सारी ,
ले तुम वापस आओगे !

आस लगी है दिल में मेरे ,
प्रिय तुम वापस आओगे !
प्रीत मेरे तुम , मीत तेरा मैं ,
मुझको गले लगाओगे !

प्यार भरे दिन याद करूँ जब ,
आँख मेरी भर आती है !
दिल में संजो के रखी मैंने ,
स्नेह की पहली पाती है !

पूंछूं रोज , हे ! विरह के बादल ,
कब तुम लौट के जाओगे ?
आयेंगे जब प्रियतम मेरे ,
प्रेम सुधा बरसाओगे ?

आस लगी है दिल में मेरे ,
प्रिय तुम वापस आओगे !
प्रीत मेरे तुम , मीत तेरा मैं ,
मुझको गले लगाओगे !

उनकी मींठी मींठी बातें ,
सुनकर मैं इठलाता था !
रूठ अगर वो मुझसे जातीं ,
ह्रदय से उन्हें मनाता था !

भाव भंवर में फसा हुआ हूँ ,
कब आ मुझे सम्हालोगे ?
देर न कर मर जाऊंगा मैं ,
फिर तुम भी पछताओगे ?
शिवम् सहज ही कहे ये तुमसे ,
ऐसा प्रेम न पाओगे !

आस लगी है दिल में मेरे ,
प्रिय तुम वापस आओगे !
प्रीत मेरे तुम  मीत तेरा मैं , 
मुझको गले लगाओगे !!

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