Saturday, November 10, 2012

मन का संशय ...


हालिया अनुभवों स्व अनुदित कविता की कुछ पंक्तियाँ .....

संदेह सहित है सब जग में ,
संशय भय मेरे रग रग में !
मन दुःख से तब भर जाता है ,
अपनों के कांटे जब हों डग में !!

जब सब ही हों सच्चे मन के ,
मन भी सैम सुंदर हो तन के !
जब झूठ फ़रेब से बचा रहूँ ,
क्यूँ फिरूं ब्यथित पागल बन के !!

अब मन में संशय है इतना ,
खुद पर ही श़क मैं करता हूँ !
सांसें भी रोके रखता हूँ ,
जब कभी कभी मैं सोता हूँ !!

........................शिवम् (मुसाफ़िर) 

Friday, October 26, 2012


मेरी नवीन अनुभूतियों से उपजे मेरे गीत की कुछ पंक्तियाँ....

..जब मैं इस दुनियां से,
 चला जाऊँगा..
सच कहता हूँ,
मैं याद बहुत आऊंगा !!

जाने वालों को भला,
किसने है रोका अबतक..
मौत की आस में,
खाया है धोखा अबतक !!

कौन जाने कि मेरी,
आखिरी कशिश क्या है..
नहीं मालूम मुझको,
मेरी परवरिश क्या है !!

लोग कहते हैं,
तू तो सभी का प्यारा है..
हकीकत ये है, बस
मौत ही अब सहारा है !!