Sunday, November 17, 2013

तो हम कैसे प्यार करे !!!

आँख के आंसू बह न सके जब,
तो हम कैसे प्यार करें।
ग़म के तूफां सह न सके जब,
तो हम कैसे प्यार करें।।
इश्क़ नहीं है इतना आसां,
की जब चाहा इश्क़ किया।
दिल की अपने कह न सके जब,
तो हम कैसे प्यार करे।।

उनकी पाक़ रूहानी शीरत,
सहज सरल सौंदर्य की मूरत।
तम को दूर करें जो किरणें,
उन किरणों सी उनकी सूरत।। 
उनकी भला बखान करूँ क्या ,
मन निर्मल जैसे गंगा जल।
बातें उनकी भगवत गीता,
कहने की कुछ नहीं जरुरत।।

उनके संग गर रह न सके जब,
तो हम कैसे प्यार करें।
गैर को अपना कह न सके जब,
तो हम कैसे प्यार करें।।
पर पीड़ा महसूस करे जो,
वो ही सच्चा स्नेही है।
भावों में उनके बह न सके जब,
तो हम कैसे प्यार करें।।

                                      … जारी .......... 

Wednesday, November 6, 2013

कहूं कैसे (भाग दो)

मधुर संगीत के पीछे , वो सुन्दर साज होता है !
मुहब्बत में कहाँ कब क्यूँ , कोई भी राज होता है !!
कहूं कैसे क्यूँ रूठे हो , नहीं मानोगे क्या अब तुम !
समर्पित हो जहाँ सब कुछ , वहाँ भला कब नाज होता है !!

दीवाना क्यूँ वो कहता है , वो पागल क्यूँ समझता है !
मोहब्बत कि नुमाइश क्यूँ , वो सरेआम करता है !!
वो मुझसे दूर कैसी है , मैं उससे दूर कैसा हूँ !
दिलों की आपसी बातें , क्यूँ वो नीलाम करता है !!

किसी को क्या फ़रक पड़ता , अगर हम जी नहीं पाते !
ज़माने की  जकारत का जहर , हम पी नहीं पाते !!
कहूं कैसे जमाने को , ज़माना क्यूँ न ये समझे !
दिलों की  दूरियों का ज़ख्म , कभी हम सी नहीं पाते !!
                                                         …………………जारी………।